Friday, August 15, 2014

मुझे पागल जो कहते हो




मुझे पागल जो कहते हो, तुम्हारी करगुजारी है,

जो सजकर तुम सँवरते हो, तुम्हारी बेकरारी है,

मुझे पागल……………………………….


मुझे छुपकर दरारों से, नज़र भर देख लेते हो,

जो मैं देखूँ तो कहते हो, हमारी बेईमानी है,

मुझे पागल……………………………….


दीवारों पे बनाते हो, मेरी तस्वीर हाथों से,

बनाते हो मिटाते हो, तुम्हारी चित्रकारी है,

मुझे पागल……………………………….

गिराकर फिर बनाते हो, घरौंदा रेत पर तुम क्यूँ,
तुम्हारी अपनी मर्जी है, तुम्हारी हिस्सेदारी है,


मुझे पागल……………………………….



निकलते हो जो राहों मे, तो मुड़के देख लेते हो,

जो संग चल दो तो समझूँ मैं, तुम्हारी रहगुज़ारी है,

मुझे पागल……………………………….


सिला मुझको मुहब्बत का मिलेगा, तुम को पाने से,

हँसाते हो रुलाते हो, तुम्हारी इख्तियारी है,

मुझे पागल……………………………….


3 comments:

Anonymous said...

best uo to now

Unknown said...

best up to now

Anonymous said...

ek dam best