Wednesday, August 27, 2014

तुम्हें सुनने की चाहत है


फकत चाहत की लेकर के, यहाँ महफिल आया हूँ,
सुनाने चंद लम्हों को, तुम्हारे दर पे आया हूँ,
बहुत है लोग महफिल मे, तुम्हें चुनने की आदत है,
हमें कहने की हशरत है, तुम्हें सुनने की चाहत है,

तुम्हारा शौक महफिल को, सजाना है मगर सुन ले,
जलाने तेरी महफिल को, तेरा एक खत मैं लाया हूँ,
तुम्हारी बेरुखी को हम कभी, उल्फ़त समझते थे,
भुलाने तेरी यादों को, तेरी महफिल मे लाया हूँ,

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