इतनी वफा भी न करो, ए मेरे हमदम,
खुल जाए राज आपका, इतना ना खिलो तुम,
हम भी तो जानते है हशिनाओ की बातें,
इतना तो कभी गौर करो, ए मेरे हमदम,
वादे वफ़ा की राह चले जा रहे तुम,
कुछ देर ढहर जाओ, इतना ना चलो तुम,
हशरत जो गर हकीकत में, बदल
जाएगी,
इतना तो यकी मुजकों नहीं, ए मेरे हमदम,
इतना तो यकी मुजकों नहीं, ए मेरे हमदम,
मुजपे यूंही सराब का भी चड़ता नशा नहीं,
इतना भी मुझको न पिलाओ, ए मेरे हमदम,
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