Tuesday, August 5, 2014

जफा-ए-यार

वो भी तो चल रहे हैं मेरी, मैयत के साथ ,
हाथों से जिनके है लिखी, मेरे खूँ की वारदात,

सदमे मे चल रहे हैं वो, ऐसे हिशाव से,
लग जाए ना ये खूँ के निशान, उनके लिवाश पे,

मुझको वफा मे इश्क के, सायद मिला शिला,
करने दफन चले हैं, मोहब्बत के राज वो,

इल्मे हुज़ूर मुझको अगर, होता जफा-ए-यार,
जानिव से मेरी वेवशी का, वो होता न राजदार,

धोकर के हाथ खूँ से लशे, मेरे तीजे की रात को,
वो कर रहे हैं जश्न-ए-गुनाह, मेरी रुख्शती के बाद,


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