ओ रे कन्हैया तेरी राधा,
देखे डगर निहार,
अब तो आजा ओ रे छलिया,
छलन चला संसार,
कब तक राह निहारू मैं,
और न कब तक छोड़ूँ आस,
आ निर्मोही आके अब तो,
दरस दिखा दे रास,
मिल न पायी,
देख न पायी,
तेरी सूरत खास,
इतनी भी क्या जल्दी थी,
जो छोड़ गया घनश्याम,
मुरली मनोहर मुरली सुनावे,
मोहे जगत अपार,
मोह के मुझको फिर क्यूँ जाबे,
क्या मेरा नहीं अधिकार,
देके पीड़ा दूर गया है,
खेलत है गोपाल,
तेरी राधा अंत समय तक,
ढूढए कर श्रिंगार,
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