इतना झूठा है की आसमा भी मांगता है इंसा,
ये जानता है के मरकर के कफन ही है मिलना,
इतना पागल है कि जन्नत भी मांगता है इंसा,
इनका बस भी जो चले तो औरों की साँसे बेंचे,
और गैरों की उमर भी मांगता है इंसा,
अपने तो गैर किए खुशियों की हसरत में,
और अपनों की खुशी क्यूँ मांगता है
इंसा,
इतना गिर कर भी जमीं में जो दफन न हुआ,
फिर भी जीने की खुशी क्यूँ मांगता है
इंसा,
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