दो फूल प्यार के, वो चड़ाने को
आ गए,
करने मुझे दफन,
वो बहाने से आ गए,
किस्मत भी गुल खिलाएगी,मुझको
यकीन न था,
बारिश मे आज दामन, भिगा कर वो
आ गए,
करके वो बंद मुट्ठी,
मिट्टी है दे रहे,
रुश्वायियों का दाग, मिटाने
वो आ गए,
करते जफा हम भी, तो मर जाते
शौक से,
वो छुपते छुपाते आज, जमाने से
आ गए,if you like the poem, please left a comment !

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