Sunday, August 3, 2014

मेरा मुरशिद



जैसे मुरशिद है मेरा, गुल के बागवाँ की तरह,
मेरा महबूब जमीं पे है, आसमाँ की तरह,

किसी गुलाब सी महके है सर्द मौसम में,
मेरा महबूब कहीं पे है, गुलिस्ताँ की तरह,

उलझने मेरी जमाने से खौफ खाती हैं,
मेरा महबूब बहीं पे हैं, निगह-बाँ की तरह,

मेरी साँसों मे धड़कता है उनका जिगर,
मेरा महबूब है मेरे, जिस्मों- जाँ की तरह,

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