फ़लक की चाहतों मे बरकत नहीं होती,
के जब तक कोई रहनुमा नहीं मिलता
जर्रे भी जमीं से फ़लक तक नहीं जाते,
जब तक हवाओं का सहारा नहीं मिलता,
महज कुछ दूर होता है ठिकाना ख्वावगाहों का,
हकीकत मे मगर ऐसा, जमाना नहीं मिलता,
बाते अक्सर वही करते है, बंदगी की,
जिन्हे गैरत में कभी आशियाना नहीं मिलता,
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