मुझसे बिछड़ के उनको, कोई गैर मिला होगा,
मेरे शहर को छोड़, शहर कोई और मिला होगा,
वादे, कसम, वफा महज़, ख़्वाब की बातें हैं,
उनकी जफा के सदके सनम, कोई और मिला होगा
चंद लकीरों से बनी, तकदीर कहाँ लेकर जाएँ,
हम शीशे के घरौंदे को, किस-किस से बचाए,
यहाँ तो कब्र पर भी दिये, जला देते है लोग,
छुपाने हम अपने अँधेरों को, कहा लेकर जाए,
if you like the poem, please left a comment !

No comments:
Post a Comment