बस्ती हैं बंजारों की सब,
चिड़िया रैन बसेरा है,
उठ-उठ गिरती सांश अधूरी,
दो पल का ये डेरा है,
हम हैं तुम हो इस दुनियाँ में,
संसार इसी से पूरा है,
प्रेमहि की है भाषा उत्तम,
प्रेम बिना अँधियारा है,
तुम आए हो जीवन मे,
हर ओर उजाला आया है,
सावन की रिमझिम हो तुम,
तुम पर जीवन वारा है,
घुंगरू बज उठते हैं मन मे,
प्रेम का तुम इकतारा हो,
भोला सा है प्रेम हमारा,
तुम इस जीवन का तारा हो,if you like the poem, please left a comment !
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