Saturday, September 13, 2014

ये जो चौदवी का चाँद है,


नकाब में  न छुपाइए, ये जो चौदवी का चाँद है,
न हिसाब से छलकाइये, ये नशीली आँखों का जाम है,

ये जो पी रहे हैं बिना पिए, ये तुम्हारा ही अहसान है,
न बंद हो जाये मैकदे, ये तुम्हारी मर्जी का काम है,

है रात में बेखुद सभी तुम्हारा नाम है ले रहे
न कही बदनाम कर दे ये जो तुम्हारी जुल्फों की शाम है,

तुम्हारी हरकत-वेहरकतों का, नुमाइसी जो अंदाज़ है,
कहीं नीलाम हो भी न जाएँ, तुम्हारे आशिक तमाम है,

हमे है मौला की खाश बरकत, तुम्हारी महफ़िल में आम है,
जिन्हें मचलने की लौ लगी है, इन्हें तो जलने से काम है,

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