हर बार खिले होंठो पर जब, मुस्कान
हृदय भर देता है,
मन भावन इस बृंदावन मे, जब प्यार कोई भर
देता है,
सारी पीड़ा ओझल हो जाती है,जब
थपकी भर कोई देता है,
चुप रहकर भी जो मुझ मे, दम भरकर सारी
पीड़ा हर लेता है,
बूंदों से ही प्यास बुझे तो मैं क्यूँ, सागर
तट तक उड़ जाऊँ,
इस नयन दृष्टि के परे फिरूँ क्यूँ, इन
नयनो को मैं भरमाऊँ,
बूंद जोड़ एक-एक आंशू की मेरे, मुझ
मे जान फूँक देता है कोई,
कंधे पर सर रखकर जब मुझमे, लड़ने
की ताकत भर देता है,
जन्म सात चलने का बादा लेकर, साथ
मेरे चलता जाता है,
जब काँटा चुभ जाये तो, अश्रु धार बादल
गहरा सा जाता है,
मुश्किल आंशा हो जाती है, जब
हांथ थाम रास्ता दिखलाता है,
कहता है मुझसे चलते जाओ, और साथ मेरे
चलता जाता है,
निस्वार्थ भाव है प्रेम सदा जिसका, और
निर्मल जल सी श्रद्धा है,
मेरे पिछले जन्मो का वरदान कोई, मुझ
पर कोई अनुकंपा है,
हर जन्म सिद्ध हो जाए जब, ऐसा
जीवन साझी बन जाता है,
प्रभु कृपा का पात्र बने कोई जब, ऐसा
साथी जीवन बन जाता है,

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