बड़ी उखड़ी नज़र है आज क्या,
सोये नहीं हो तुम?
जवां है इश्क का मौसम,
कहाँ खोये हुए हो तुम?
नज़र आता है के तबीयत ज़रा,
नाज़ुक तुम्हारी है,
ये लगता है के सब-भर प्यार
मे, रोये हुए हो तुम,
ये कमसिन सी जवानी को खुदा,
रहमत जवां बख्शे,
ये मुमकिन हो के संगेदिल,
कहीं पाये नहीं हो तुम,
गुलाबों के चमन मे तो,
ख़लिश काँटों की है मुमकिन,
किसी की बेखुदी के ज़ख्म तो,
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