Friday, July 25, 2014

अकीदद

मेरे अपनों की ख्याहिश का, सवव तुम याद रख लेना,
के जब पहनों ये चूनर तो, उन्हे तुम याद कर लेना,

बड़े अरमान से भेजे हैं, ये तोहफ़े मोहब्बत के,
के जब निकलो गली से तुम, करम ये याद रख लेना,

के जब अहशान भारी हो, दिलों की चाह से बढ़कर,
समझ कर आदतों को तुम , उन्हें अरमा समझ लेना,

अकीदद का सवव है ये, के जब खुशियाँ लुटानी हों,
के कुरवां यार तूँ अपनी, ख़ुशी  दो-चार कर देना,

मेरे अपनों की ख्याहिश का, सवव तुम याद रख लेना,

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